बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रही

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शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है।

Nazar Ki Dua – नजर बद से बचने की दुआ और इस्लामी रहनुमाई

Nazar Ki Dua – जानिए नज़र बद से बचने की सबसे असरदार दुआ, क़ुरआन और हदीस से हिफ़ाज़त के तरीके, और तफ़्सीर के साथ इस्लामी रहनुमाई।

नज़र बद क्या है?

इस्लाम में नज़र बद (Evil Eye) को एक हकीकत माना गया है। कई हदीसों और क़ुरआनी आयतों में इसका ज़िक्र किया गया है कि कुछ लोगों की नज़रें नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह सिर्फ जलन या हसद (ईर्ष्या) से नहीं बल्कि किसी की बहुत ज़्यादा तारीफ़ करने से भी हो सकती है।

1. नज़र बद का असर क्यों होता है?

नज़र एक ऐसी ताकत होती है जो किसी की सेहत, कामयाबी, दौलत, खुशहाली और यहां तक कि बच्चों और जानवरों को भी प्रभावित कर सकती है।

2. नज़र बद की हदीस

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:

नज़र बद हक़ (सच्चाई) है। अगर कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती तो वह नज़र होती।

(सहीह मुस्लिम: 2188)

3. नज़र बद की आयत

और जब उन (काफ़िरों) ने ज़िक्र (क़ुरआन) सुना तो वे तुम्हें अपनी नज़रों से गिराने की कोशिश करने लगे और कहने लगे: ‘ये तो दीवाना है’।”

(सूरह अल-क़लम: 68:51)

✅ इस आयत में इशारा है कि नज़र की ताकत होती है और यह नुकसान पहुंचा सकती है।

नज़र बद से बचने की दुआ (Dua to Protect from Evil Eye)

इस्लाम में हमें नज़र से हिफ़ाज़त के लिए कई दुआएं और उपाय बताए गए हैं।

1. सूरह फलक और सूरह नास पढ़ना

रसूलुल्लाह () हर रात सोने से पहले दोनों हाथों में फूँक मारकर सूरह इख़लास, सूरह फलक और सूरह नास पढ़कर अपने पूरे बदन पर फेरते थे।”

(सहीह बुखारी: 5017)

2. आयतुल कुर्सी पढ़ना

जो कोई आयतुल कुर्सी रात को पढ़ ले, अल्लाह उसकी हिफ़ाज़त के लिए एक फ़रिश्ता मुक़र्रर कर देता है।

(सहीह बुखारी: 2311)

3. यह दुआ पढ़ें (Authentic Nazar Ki Dua)

“A’udhu bikalimatillahit-tammati min kulli shaitanin wa hammah, wa min kulli ‘aynin lammah.”

अर्थ: “मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह चाहता हूँ, हर शैतान, ज़हरीले जानवर और हर बुरी नज़र से।”

(सहीह मुस्लिम: 2708)

4. Nazar Ki Dua – यह छोटी दुआ बार-बार पढ़ें

Bismillahil-ladhi la yadurru ma’asmihi shay’un fil-ardi wa la fis-sama’i, wa huwas-sami’ul-alim.

अर्थ: “अल्लाह के नाम के साथ, जिसके नाम से कोई चीज़ ज़मीन और आसमान में नुकसान नहीं पहुंचा सकती, और वह सब कुछ सुनने और जानने वाला है।”

(सुनन अबू दाऊद: 5088)

नज़र बद से बचने के इस्लामी तरीके

1. हमेशा अल्लाह का ज़िक्र करें

सुबह-शाम की मस्नून दुआएं पढ़ें।

2. घर में सूरह बकरा की तिलावत करें

इससे बुरी नज़र, जिन्न और शैतान भाग जाते हैं।

3. तकबीर (अल्लाहु अकबर) और तस्बीह (सुभानअल्लाह) ज़्यादा पढ़ें।

4. बच्चों पर हाथ रखकर नबी (ﷺ) की सिखाई हुई दुआ पढ़ें:

“ऊईज़ुकुमा बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माह मिन कुल्ली शैतानिन वहाम्मा, व मिन कुल्ली ‘अइनिन लाम्माह।”

(सहीह बुखारी: 3371)

अगर किसी को नज़र लग जाए तो क्या करें?

1. जिस व्यक्ति से नज़र लगी है, उससे वुज़ू करवाएं

जिस व्यक्ति से नज़र लगी हो, उससे वुज़ू करवाएं और उस पानी से मरीज़ को नहलाएं।

(सुनन अबू दाऊद: 3880)

2. मस्जिद में जाकर दुआ करें और आयतुल कुर्सी, सूरह फलक-नास पढ़ें।

3. काले धागे, ताबीज और जादू-टोने से बचें – यह इस्लाम में हराम है।

तफ़्सीर: नज़र बद से बचाव का कुरआनी नजरिया

तफ़्सीर के मुताबिक, बुरी नज़र हसद (ईर्ष्या) से पैदा होती है। अल्लाह ने हमें सूरह फलक और सूरह नास में शर से पनाह मांगने का हुक्म दिया है।

इब्ने कसीर रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं:

“जब यह आयतें नबी (ﷺ) पर नाज़िल हुईं, तो उन्होंने खुद को जिन्न, इंसान और बुरी नज़रों से बचाने के लिए इनकी तिलावत करना शुरू कर दिया।”

नज़र बद से जुड़ी गलतफहमियां

❌ क्या ताबीज पहनना नज़र से बचाएगा?

नहीं, यह इस्लाम में हराम है। नबी (ﷺ) ने ताबीज पहनने से मना किया है।

(मुसनद अहमद: 17440)

❌ क्या लाल मिर्च और झाड़-फूंक से नज़र उतरती है?

नहीं, यह ग़लत तरीका है। सही तरीका सिर्फ़ दुआ और कुरआन की तिलावत है।

❌ क्या सिर्फ हसद करने से ही नज़र लगती है?

नहीं, अगर कोई बिना “माशा अल्लाह” कहे बहुत तारीफ़ करता है, तो भी नज़र लग सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

✔ नज़र बद हकीकत है और इसका इलाज इस्लाम में बताया गया है।

✔ सूरह फलक, सूरह नास, आयतुल कुर्सी और हदीसों में दी गई Nazar Ki Dua सबसे असरदार हैं।

✔ नज़र बद से बचने के लिए हर मुसलमान को अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और तौहीद को मजबूत करना चाहिए।

✔ झाड़-फूंक, ताबीज और गलत तरीकों से बचना चाहिए।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या सच में नज़र बद होती है?

हाँ, सहीह हदीसों में इसका ज़िक्र आया है कि नज़र बद एक सच्चाई है।

Q2: क्या काले धागे या ताबीज पहनने से नज़र से बचाव होता है?

नहीं, यह हराम है। सिर्फ दुआएं और कुरआनी आयतें पढ़ना ही सही तरीका है।

Q3: क्या हर कोई नज़र लगा सकता है?

हाँ, जानबूझकर या अनजाने में कोई भी नज़र लगा सकता है।

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